धरमजयगढ़ में कोर्ट भवन निर्माण को लेकर विवाद, पुलिस कॉलोनी की महिलाओं और वकीलों में टकराव

धरमजयगढ़। शहर में प्रस्तावित न्यायालय भवन निर्माण को लेकर स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। थाना परिसर की जमीन पर कोर्ट भवन बनाने के प्रस्ताव का विरोध कर रही पुलिस कॉलोनी की महिलाओं और वकीलों के बीच आज तीखा विवाद देखने को मिला। दोनों पक्षों के बीच लंबी बहस और जमकर हंगामा हुआ।



विरोध का कारण

महिलाओं का कहना है कि जिस भूमि पर न्यायालय भवन का निर्माण प्रस्तावित है, वह दशकों से थाना परिसर और पुलिस कॉलोनी के रूप में उपयोग में है। उनके अनुसार, यदि भवन का निर्माण हुआ तो कई आवासीय क्वार्टर तोड़े जाएंगे और परिवारों के साथ-साथ उनके बच्चे भी प्रभावित होंगे। महिलाएं प्रशासन पर आरोप लगा रही हैं कि इस निर्णय के लिए उनसे कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई और अन्य शासकीय भूमि होने के बावजूद जबरन थाना परिसर की जमीन को चुना जा रहा है।



पुराने रिकॉर्ड का हवाला

मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन 1929 से थाना संचालन और पुलिस कॉलोनी के लिए उपयोग में है। इसमें पुलिस कार्यालय, आवासीय क्वार्टर, बैरक और अन्य संरचनाएं स्थित हैं। वर्ष 2012 में भी राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को थाना परिसर के रूप में दर्ज किया गया था। यही आधार पुलिस परिवारों को अपनी स्थिति बचाए रखने के लिए दिया जा रहा है।



प्रशासन के सामने चुनौती

न्यायालय भवन निर्माण के लिए उचित स्थान की आवश्यकता एक ओर है, वहीं वर्षों से निवास कर रहे पुलिस परिवारों का विस्थापन प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। यदि विवाद का समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।



2012 के दस्तावेज का खुलासा

धरमजयगढ़ तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी दस्तावेज में वर्ष 2012 में इस भूमि को औपचारिक रूप से नजूल प्लॉट संख्या 1384 से 1386/1 सहित विभिन्न क्रमांकों के तहत थाना धर्मजयगढ़ के अधीन दर्ज किया गया है। दस्तावेज़ के अनुसार, यह भूमि राज परिवार द्वारा वर्ष 1929 में थाना संचालन के लिए दी गई थी।



अगले कदम

वर्तमान में न्यायालय की ओर से स्पष्टीकरण का इंतजार है। संबंधित दस्तावेजों और पक्षकारों के विवरण के बाद ही विवाद का पूरा सच सामने आ सकेगा। प्रशासन की चुनौती अब यह है कि न्यायालय भवन निर्माण और पुलिस कॉलोनी के संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाए।

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